नारी ही नर का करे सृजन ,
अनुपम है नारी का जीवन ।
बचपन का करती संरक्षण ,
ममता का अमृत पिला पिलाकर ।
प्रथम गुरु होती शिशु की ,
है ज्ञान का करती संवर्धन ।
नर का निखारती जो व्यक्तित्व ,
संकट में सदा उसका अस्तित्व ।
जग में होता उसका उत्थान ,
जो नारी का करते सम्मान ।
सम्बन्ध बना है अति पावन ,
नर - नारी का ऐसा बंधन ।
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