गौरी ब्याह करो ना शिव शंकर से ,
वो तो भोले भाले ।
खाते भांग धतूरा वो तो
रहते हैं मतवाले ।
गौरी............।
अंग भभूत और मृगछाला ,
सर्प गले लटकाए ,
बैल सवारी करने वाले
रूप विचित्र बनाए ।
ऐसे मस्त मलंग सदा
शमशान में रहने वाले ,
गौरी..............।
महलों में रहने वाली
जंगल चल दीं तप करने ,
तीन लोक वश में जिसके
शिव शंकर सा वर पाने ।
भूत प्रेत संग रहते जिसके ,
ऐसे वो घर वाले ।
गौरी...............।
बड़े भाग्य 'मंजू ' के
गुण गौरी शंकर के गाये ,
तीन लोक में और कहीं न
जोड़ी ऐसी पाये ।
सबको नाच नचावे वो तो
ऐसे डमरू वाले ,
गौरी ..................।
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