हम चलें नित न्याय के पथ
छोड़ सब अभिमान ,
दो यही वरदान हे माँ.....
हर बुराई से बचें हम
प्रेम हृदय में रहे ,
दूसरों को मान दें
अपमान खुद भी ना सहें ।
तन समर्पित, मन समर्पित ,
ऐसे हों धनवान ,
दो यही.............।
भक्त हैं अज्ञान हम
माँ ज्ञान का भंडार तुम ,
ज्ञान से भर दो कलश
इतना करो उपकार तुम ।
हम करें सत्कर्म जिससे ,
हो सदा कल्यांण ।
दो यही...............।
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