जीवन है पल दो पल का तमाशा ,
कभी थोड़ी आशा कभी है निराशा ।
है तकदीर कुदरत ने कैसी लिखी ,
कभी ग़म दिया तो कभी दी खुशी ।
कभी रोशनी तो कभी है कुहासा ,
कभी थोड़ी आशा...................।
है हर आदमी माटी का खिलौना ,
अगर टूट जाये तो फिर से जुड़े ना ।
हो जीवन सफल कुछ करो कर्म ऐसा ,
कभी थोड़ी आशा ......................।
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