. बाबूजी वो बचपन दो ,
प्यारा सा वो आंगन दो ।
बागों में घूमूं गलियों में घूमूं ,
पकड़ू तितलियां सखियों संग खेलूं ।
माँ का महकता आंचल दो ,
प्यारा सा.......... ।
थाम के उँगली मेले में ,
फिर से झूलूं झूले में ।
वो सारे गुब्बारे दो ,
प्यारा सा.............।
रुठी है वो गुड़िया अब भी ,
आए नहीं मनाने तुम भी ।
कब आओगे ये कह दो ,
प्यारा सा............।
बाबूजी वो बचपन दो.....।
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