हिंदू हो या मुसलमान ,
बनो एक अच्छा इंसान ।
नफरत की दीवारें तोड़ो ,
मजहब की जंजीरें तोड़ो ।
अपने मन को रखो चंगा ,
बहे प्रेम की निर्मल गंगा ।
इक पल व्यर्थ गँवाओ ना ,
करो सदा जनहित की चिंता ।
सदा सभी को दो सम्मान ,
लघुता छोड़ो बनो महान ।
देश - प्रेम हो धर्म तुम्हारा ,
और बढ़ाओ भाईचारा ,
तुम्हें कसम है हर शहीद की ,
गीता और कुरान की ।
बनो शेर अब वार करो कि ,
कांप उठे हर आतंकी ।
इंकलाब का एक बार तुम ,
फिर से बिगुल बजाओ ना ।
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