मन के मंदिर में दीपक जला के
माँ तेरा दीदार करती रहूँ ,
गाती रहूँ माँ भजन तेरे यूं ही
गुणगान तेरा करती रहूँ ।
मन के ...............।
तेरे भरोसे जीवन की नइया
पतवार तेरे हाथों में माँ ,
मैं डूब जाऊँ ना जग के भँवर में
अब पार जल्दी से कर दो हे माँ ।
कोई नहीं और मेरा हे माँ ,
तेरे सहारे चलती रहूँ ।
मन के.............।
हर मोड़ पे माँ पाऊँ तुम्हे ही
जब भी कठिन हों राहें मेरी ,
जग के अंधेरों में जब मैं घिरूँ
तुम थाम लेना बाँहें मेरी ।
जब तक रहूँ माँ तेरा साथ हो ,
तेरी सेवा करती रहूँ ।
मन के...................।
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