अब दर्शन दो मइया खड़ी दरबार में मैं कबसे ,
छोड़ दिया सब तेरे हवाले तू मिली जबसे ।
अब दर्शन दो ..........।
तेरे भरोसे जग में मैंने
अपनी नाव चलाई ,
डूब रही मँझधार में अब माँ
तूभी पास न आई ।
सूझे ना अब कोई किनारा
पार करूँ कैसे ।
अब दर्शन दो ..........।
जब -जब जनम मिले धरती पर
तेरी शरण मिले ,
सेवा करने को मुझको माँ
तेरे चरण मिले। ।
देना माँ हर बार सहारा
आस यही तुमसे। ।
अब दर्शन दो.............।
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