Saturday, 1 April 2017

अब दर्शन दो मइया

अब दर्शन दो   मइया खड़ी दरबार में मैं कबसे ,

छोड़ दिया सब तेरे हवाले तू मिली जबसे ।

अब दर्शन दो  ..........।

तेरे भरोसे जग में मैंने

अपनी नाव चलाई ,

डूब रही मँझधार में अब माँ

तूभी पास न आई  ।

सूझे ना अब कोई किनारा

पार करूँ कैसे ।

अब दर्शन दो ..........।

जब -जब जनम मिले धरती पर

तेरी शरण मिले  ,

सेवा करने को मुझको माँ

तेरे चरण मिले। ।

देना माँ हर बार सहारा

आस यही तुमसे। ।

अब दर्शन दो.............।

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