Tuesday, 4 April 2017

लो चली मैं (भजन)

लो चली मैं अपनी  मइया से दरबार मिलने

लो चली मैं........

हाथों में लेके पूजा की थाली ,

  मइया का श्रृंगार करने ।

  लो चली मैं.........

  आँखों में कजरा सजे, बालों में गजरा सजे ,

  हाथों की चूड़ियां खन-खन बाजे हैं ।

  माथे पे बिंदिया सजे, नाक में नथिया सजे ,

  ऐसा रूप सलोना माँ का है ।

   मइया के दर्शन की आस लेके,

   सखियों को भी साथ लेके

   लो चली मैं.........

   कानों में कुण्डल जँचे, दिल में हलचल मचे ,

  लाल चुनरिया लहर-लहर लहराए ।

  हाथों में मेंहदी सजे, पैर मेहावर रचे ,

  पायल का घुंघरू छन-छन बाजे है ।

  सपने हजारों मन में ,

  मैं अपनी  मइया से फरियाद करने ।

  लो चली मैं.............

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