लो चली मैं अपनी मइया से दरबार मिलने
लो चली मैं........
हाथों में लेके पूजा की थाली ,
मइया का श्रृंगार करने ।
लो चली मैं.........
आँखों में कजरा सजे, बालों में गजरा सजे ,
हाथों की चूड़ियां खन-खन बाजे हैं ।
माथे पे बिंदिया सजे, नाक में नथिया सजे ,
ऐसा रूप सलोना माँ का है ।
मइया के दर्शन की आस लेके,
सखियों को भी साथ लेके
लो चली मैं.........
कानों में कुण्डल जँचे, दिल में हलचल मचे ,
लाल चुनरिया लहर-लहर लहराए ।
हाथों में मेंहदी सजे, पैर मेहावर रचे ,
पायल का घुंघरू छन-छन बाजे है ।
सपने हजारों मन में ,
मैं अपनी मइया से फरियाद करने ।
लो चली मैं.............
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