इक निर्बल तुझे पुकारे माँ सहारा चाहिए ,
डूब रही इक नइया को किनारा चाहिए ।
बड़ी आस से वो तेरे दरबार में आया है ,
अपना सब कुछ माँ तेरे
चरणों में लुटाया है ।
उसकी सुनो पुकार हे माँ पाटनवालिए ,
डूब रही...............।
जाने ना माया निर्मल है उसकी काया ,
जग की धूप से बचने को
वो तेरी छाँव में आया ।
कर दो बेड़ा पार हे माँ वैष्णोवालिए ,
डूब रही..................।
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