ऊँचा - ऊँचा है तेरा दरबार मइया जी ,
कैसे आऊं मैं चल के तेरे द्वार मइया जी । ऊँचा.....
पर्वत पे तू रहती मइया मैं कैसे आऊं ,
बड़ा कठिन है रस्ता मइया मैं ना चढ़ पाऊं ।
थाम लो अब तुम मेरे दोनों हाथ मइया जी । ऊँचा.....
बड़ी दूर से मइया तेरे दर्शन को आईं ,
ढूंढ़ रही हैं अँखियां तुमको देख नहीं पाईं ।
ऐसे तोड़ो ना मेरी तुम आस मइया जी । ऊँचा......
गिर ना जाऊँ राहों में माँ अपने हाथ बढ़ा दो ,
हाथ पकड़ के मइया मेरी अपने पास बुला लो ।
कैसे पाऊँ मैं तेरा दीदार मइया जी । ऊँचा.......
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