Sunday, 26 March 2017

दरबार खड़ी माँ तेरे (भजन )

दरबार खड़ी माँ तेरे अब दूर करो अंधेरे ,

शेरावालिए माँ लेहड़ावालिएदरबार.......

हारी हूँ माँ मैं हारी जीवन ये हो गया भारी ,

अब तो उपकार करो माँ मैं आई शरण तुम्हारी ।

इस बार नहीं मानूंगी तेरे द्वार से ना जाऊंगी ,

वैष्णोवालिए माँ पहाड़ावालिएदरबार........

माँ ढूंढ़ लिया है तुमको अब दूर न जाना मुझसे ,

पूरी मुराद हो जाये है आस यही अब तुमसे ।

भंडार भरे हैं तेरे दु:ख दूर करो माँ मेरे ,

मैहरवालिए माँ पाटनवालिएदरबार........

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