अम्बे रानी की है रात आई ,
शेरा वाली की है रात आई ।
माँ के दरबार जाओ
जाके माँ को मनाओ ,
पूरी होंगी मुरादें जाके झोली फैलाओ ।
ये मुरादों की नवरात्र आई ,
वैष्णो वाली की है रात आई ।
जो हो बेसहारा माँ है उसका सहारा ,
बहे आँसू की धारा नहीं सूझे किनारा ।
उसे माँ ने गले से लगाई ,
मैहर वाली की है रात आई ।
अम्बे रानी............।
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