Sunday, 26 March 2017

जब यज्ञ ठाना दक्ष ने (सती काण्ड )

जब यज्ञ ठाना दक्ष ने

पूछा नहीं शिव जी को ,

तब क्रुध्द होकर के सती ने

तज दिया प्राणों को । जब यज्ञ ..........

मानी नहीं बेटी थीं वो

मैके को अपने चल पड़ीं ,

थे साथ में शिव जी के गण

होनी थी अनहोनी बड़ी ।

पहुँचीं तो देखा यज्ञ में

स्थान शिव जी का नहीं ,

आए थे सारे देवता

आए थे सारे ऋषि मुनि ।

अपमान पति का सह ना पाईं

मन ही मन आहत  हुईं ,

ना रोक पाईं एक पल

प्राणों की आहुति दे   गई ।

शिव जी के गण क्रोधित  हुए

सिर को अलग धड़़  से किया ,

मति मारी थी उस दक्ष की

जिसका मिला उसको सिला ।

  कैसी है लीला जगत की

  बेटी पराई मानते   ,

  होती है जैसे ही बड़ी

  आँगन में दूजे फेंकते  ।

  ऐसा न होता जग मे तो

  होती न उसकी दुर्गती  ,

  होती न   कोई  फिर सती ..

  होती ....................।

  होती....................।

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