Monday, 20 March 2017

कहाँ है बता दो अब (भजन )

कहाँ है बता दो अब तेरा दरबार माँ

तेरा दरबार माँ,

दूर से आई तेरे दर्शन को।कहाँ है......

नंगे-नंगे पाँव मेरे छाले पड़े हैं,

कैसे चलें तेरे सहारे खड़े हैं।

अब तो बुला लो बढ़ा के तू हाथ माँ

बढ़ा के तू हाथ माँ,
दूर से आई तेरे दर्शन को ।कहाँ है.....

पहाड़ों पे ढूढ़ते हैं गुफाओं में ढूढ़ते हैं ,

टेढ़े-मेढ़े रास्तों में नजारों में ढूढ़ते हैं।

दिखे ना कहीं भी तेरी छवि एक बार माँ

छवि एक बार माँ,

दूर से आई तेरे दर्शन को। कहाँ है.....

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