अबला सी रोती रहती
ताकत अपनी खोती रहती,
पहचान पाने को आतुर
व्यथा अपनी किस,किससे कहती।
पत्थरदिल इंसानों को
सारी कमियां उसमें दिखतीं।
जब सहन नहीं कर पाती
तब ज्वाला हृदय में जल उठती
संतप्त हृदय न हुआ शीतल ,
तब जाग उठी नारी शक्ति ।...
Wednesday, 8 March 2017
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