तारों की बारात लेके चली
इक आसमां से परी,
धरती को सौगात देने चली
इक आसमां से परी।
चंचल नदिया के जैसे,
बलखाती बरखा के जैसे,
सूरज की किरणों से ली रोशनी
इक आसमां से परी।
तारों की........
तितली ने पूछा तू आई कहाँ से
भौंरे ने पूछा पता तेरा क्या है।
बुलबुल सी वो चहकने लगी,
इक आसमां से परी
तारों की ..
बहकी हवाओं के जैसी
महकी फिज़ाओ के जैसी
फूलों से भी वो लगती हसीं,
इक आसमां से परी
तारों की.....।
Tuesday, 21 February 2017
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment