हर बार होलिका जलती है
बुराई मिटाने के लिए,
जब एक नारी की अस्मिता
जलती है तो कौन आता है
बचाने के लिए।
सभी अपनी ही रोटियाँ सेंक लेते हैं
जब लगी हो आग किसी के दिल में,
किससे पूँछे कि जलाये
किसने कितने दिये।
अंधेरे खुद ही मिट जायेंगे
जब होंगे दिल रोशन,
कभी खुद के लिए तो कभी
दूसरों के लिए जियें।
Saturday, 11 March 2017
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