Tuesday, 10 November 2015

धन्य-धन्य तब हुई धरा

धन्य-धन्य तब हुई धरा

जब विष्णु जी अवतार लिए ,

कभी राम कभी कृष्ण बने

कभी नरसिंह बन संहार किए |

मंथन किया समुद्र में

असुरों-देवों ने बहुरत्न मिला ,

कामधेनु और कल्पवृक्ष संग

अमृत और विष भी निकला |

अमृत छीन लिया असुरों ने

विष का प्याला कौन पिए ,

मोहिनी रूप धरा प्रभु ने

असुरों से अमृत छल से लिए |

देवों को अमृत बाँटा और

विष का प्याला शिव जी पिए ,

धन्य-धन्य तब हुई धरा

जब असुरों का संहार किए |

पाप बोझ से दबी हुई

धरती माँ का उद्धार किए ,

मानव रूप लिया धरती पर

मानव का कल्याण किए |

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