धन्य-धन्य तब हुई
धरा
जब विष्णु जी अवतार
लिए ,
कभी राम कभी कृष्ण बने
कभी नरसिंह बन संहार किए |
मंथन किया समुद्र में
असुरों-देवों ने बहुरत्न मिला ,
कामधेनु और
कल्पवृक्ष संग
अमृत और विष भी निकला |
अमृत छीन लिया असुरों ने
विष का प्याला कौन पिए ,
मोहिनी रूप धरा प्रभु ने
असुरों से अमृत छल से लिए |
देवों को अमृत बाँटा और
विष का प्याला शिव जी पिए ,
धन्य-धन्य तब हुई धरा
जब असुरों का संहार किए |
पाप बोझ से दबी हुई
धरती माँ का उद्धार किए ,
मानव रूप लिया धरती पर
मानव का कल्याण किए
|
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