Wednesday, 8 July 2015

बेटी का दर्द

माँ तुमने मुझे जनम दिया क्यूं ,

इतनी बड़ी सजा दिया क्यूं |

काश की अब तक छोटी होती ,

तेरे पहलू में सोती |

बेटी होते ही क्यूं उसको ?


सजा सुनाई जाती है ,                                 

होती है ज्यों बड़ी तो क्यूं माँ

वो रुलाई जाती है |

एक तो तुझको खोने का ही

दर्द सहा जाता था नहीं,

अब तो तेरे जाने पर

तेरी कब्र भी गाली पाती है |

माँ तू कहीं जनम ले तो

तुझे बेटी न बनना पड़े ,

बेटी बन भी जाना तो


बेटी को जनम न देना कभी |

No comments: