न जाने कौन सी कसक
दिल में
कि पलकों में आँसू
समाते नहीं थे,
कभी होठ ये
मुस्कुराते नहीं थे,
न जाने कौन सी कसक
दिल में |
धड़कन मेरी बस यूं ही
चल रही थी,
जीवन में कोई भी
हलचल नहीं थी,
सूनी सी दुनिया में
मैं खोई–खोई
जीने की कोई तमन्ना
नहीं थी |
न जाने कौन सी तड़प
दिल में
कभी होठ ये
गुनगुनाते नहीं थे,
कि खुशियों के मंजर
सुहाते नहीं थे
न जाने कौन सी कसक
दिल में |
सदियों से मैंने जो
नाव ढूंढी
वो आज मुझको किनारे
पे लाई,
दुनिया में थी मैं
कबसे अकेली
खुशियों की कलियां
हैं अब मुस्कुराई |
न जाने कौन सी महक
दिल में
कभी अबसे पहले जो
पाते नहीं थे,
बहारों के दिन पहले
आते नहीं थे,
न जाने कौन सी कसक
दिल में |
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