Monday, 8 June 2015

न जाने कौन सी कसक दिल में

न जाने कौन सी कसक दिल में

कि पलकों में आँसू समाते नहीं थे,

कभी होठ ये मुस्कुराते नहीं थे,

न जाने कौन सी कसक दिल में |

धड़कन मेरी बस यूं ही चल रही थी,


जीवन में कोई भी हलचल नहीं थी,

सूनी सी दुनिया में मैं खोई–खोई

जीने की कोई तमन्ना नहीं थी |

न जाने कौन सी तड़प दिल में  

कभी होठ ये गुनगुनाते नहीं थे,

कि खुशियों के मंजर सुहाते नहीं थे

न जाने कौन सी कसक दिल में |

सदियों से मैंने जो नाव ढूंढी

वो आज मुझको किनारे पे लाई,

दुनिया में थी मैं कबसे अकेली

खुशियों की कलियां हैं अब मुस्कुराई |

न जाने कौन सी महक दिल में

कभी अबसे पहले जो पाते नहीं थे,

बहारों के दिन पहले आते नहीं थे,

न जाने कौन सी कसक दिल में | 

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