धूप को भी देखा है
छाँव को भी देखा है ,
काले बादलों के बीच
चाँद को भी देखा है |
आज हैं अँधेरे तो कल
रोशनी भी होगी ,
चाँद आसमां में तो
चाँदनी भी होगी |
दिन भी मैंने देखा
है रात मैंने देखा है ,
काले बादलों के बीच
चाँद को भी देखा है |
धुंध है घना तो क्या
चुप है आसमां तो क्या ,
पूरे होंगे ख्वाब
सारे आज खाली हाथ तो क्या |
पत्थरों के बीच में
रास्तों को देखा है ,
काले बादलों के बीच
चाँद को भी देखा है |
कल हमारा हो न हो आज
को जी लें हम ,
चार पल ये जिंदगी के
खुशबुओं से भर लें हम |
पतझड़ों के बाद मौसम
का खुमार देखा है ,
काले बादलों के बीच
चाँद को भी देखा है |
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