Wednesday, 3 June 2015

धूप को भी देखा है

धूप को भी देखा है छाँव को भी देखा है ,

काले बादलों के बीच चाँद को भी देखा है |

आज हैं अँधेरे तो कल रोशनी भी होगी ,

चाँद आसमां में तो चाँदनी भी होगी |

दिन भी मैंने देखा है रात मैंने देखा है ,


काले बादलों के बीच चाँद को भी देखा है |

धुंध है घना तो क्या चुप है आसमां तो क्या ,

पूरे होंगे ख्वाब सारे आज खाली हाथ तो क्या |

पत्थरों के बीच में रास्तों को देखा है ,

काले बादलों के बीच चाँद को भी देखा है |

कल हमारा हो न हो आज को जी लें हम ,

चार पल ये जिंदगी के खुशबुओं से भर लें हम |

पतझड़ों के बाद मौसम का खुमार देखा है ,

काले बादलों के बीच चाँद को भी देखा है |  

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