तारे हजारों हैं
आसमां में ,
पर चाँद की बात है
और ही |
लाखों फरिश्ते उतरें
जमीं पे,
पर आपकी बात है और
ही |
सीने में अपने हर गम
छुपाके ,
बस आपको चाहते हम
रहें |
आयेगी रुत प्यार की
फिर कभी तो ,
इस आस में जागते हम
रहे |
दिल में बसाये हैं
आज तक जो ,
मूरत किसी की वो हैं
आप ही |
तारें हजारों हैं
आसमां में पर चाँद की बात है और ही |
राहें थीं मुश्किल
,मंजिल का मेरे
कोई ठिकाना नहीं जब
रहा ,
टूटी थी माला मोती
थे बिखरे
कोई तराना नहीं जब
रहा |
तब हाथ मेरा थामा था
जिसने ,
मंजिल दिखाई वो हैं
आप ही |
तारे हजारों हैं
आसमां में पर चाँद की बात है और ही |
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