Wednesday, 3 June 2015

तारे हजारों हैं आसमां में

तारे हजारों हैं आसमां में ,

पर चाँद की बात है और ही |

लाखों फरिश्ते उतरें जमीं पे,

पर आपकी बात है और ही |

सीने में अपने हर गम छुपाके ,


बस आपको चाहते हम रहें |

आयेगी रुत प्यार की फिर कभी तो ,

इस आस में जागते हम रहे |

दिल में बसाये हैं आज तक जो ,

मूरत किसी की वो हैं आप ही |

तारें हजारों हैं आसमां में पर चाँद की बात है और ही |

राहें थीं मुश्किल ,मंजिल का मेरे

कोई ठिकाना नहीं जब रहा ,

टूटी थी माला मोती थे बिखरे

कोई तराना नहीं जब रहा |

तब हाथ मेरा थामा था जिसने ,

मंजिल दिखाई वो हैं आप ही |


तारे हजारों हैं आसमां में पर चाँद की बात है और ही |

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