जीवन में तूफां है
दो दिन का मेहमां,
कहती है नदिया की
धारा |
लहरों के डर से घबड़ा
न इन्सां,
होगा कभी तो किनारा
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कैसी भी उलझन हो
कैसी भी हलचल,
सबसे निकलना तुम्हें
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आये हो जग में जब
तुम भँवर में,
सब कुछ है सहना
तुम्हे |
आशा की डोरी पकडे
रहो तुम ,
होगा कोई तो इशारा |
लहरों के डर से घबड़ा
न इन्सां,
होगा कभी तो किनारा
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सूरज हमेशा यूँ न
छिपेगा,
हर रात काली न होगी
यूँ ही |
दुःख के जो बादल हैं
इक दिन छटेंगे |
सुख की भी कलियाँ
खिलेंगी यूँ ही,
खुशियों से दामन
तेरा भरेगा होगा कोई तो सहारा |
लहरों के डर से घबड़ा
न इन्सां,
होगा कभी तो किनारा
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