Tuesday, 2 June 2015

घबड़ा न इन्सां

जीवन में तूफां है दो दिन का मेहमां,

कहती है नदिया की धारा |

लहरों के डर से घबड़ा न इन्सां,

होगा कभी तो किनारा |

कैसी भी उलझन हो कैसी भी हलचल,


सबसे निकलना तुम्हें |

आये हो जग में जब तुम भँवर में,

सब कुछ है सहना तुम्हे |

आशा की डोरी पकडे रहो तुम ,

होगा कोई तो इशारा |

लहरों के डर से घबड़ा न इन्सां,

होगा कभी तो किनारा |

सूरज हमेशा यूँ न छिपेगा,

हर रात काली न होगी यूँ ही |

दुःख के जो बादल हैं इक दिन छटेंगे |

सुख की भी कलियाँ खिलेंगी यूँ ही,

खुशियों से दामन तेरा भरेगा होगा कोई तो सहारा |

लहरों के डर से घबड़ा न इन्सां,


होगा कभी तो किनारा |

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