कहाँ पाऊँ वो आँचल
की छाँव अब ,
कहाँ पाऊँ वो ममता
दुलार अब |
थाम ऊँगली मेरी चलना
सिखाया ,
मुझ अबोध को बोध सब
कराया |
मैं दुनिया में आई
अकेली माँ ,
मुझे दुनिया में
रहना सिखाया |
मैं दुनिया से डरती
रही माँ ,
तूने दुनिया से लड़ना
सिखाया |
दिल बहाता है खून
आँसू अब ,
नहीं दिखता है कोई
किनारा |
कहाँ पाऊँगी तुमको
दोबारा ,
माँ तुम ही थी मेरा
सहारा |
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