कलियुग के
विश्वामित्रों !
तुम बचना जरा
मेनकाओं से |
पहले ये इठलाती हैं,
फिर हाव-भाव दिखलाती
हैं,
जब हो जाते तुम
मजबूर,
ये अपने रंग दिखाती
हैं |
माल ऐंठना इनका काम,
करती हैं तुमको
बदनाम,
कितने घर करतीं
बर्बाद,
फिर भी रहती हैं
आबाद |
इनके चक्कर में पड़कर तुम,
नहीं गिराओ अपना
मान |
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