Thursday, 21 May 2015

आंसुओं ने है तुझको पुकारा

आंसुओं ने है तुझको पुकारा,

राह तकते हैं नैन तुम्हारा |

जिसका कोई नहीं इस जहां में,

माँ ही होती है उसका सहारा |


मैंने जब-जब तुझे है पुकारा,

तूने तब-तब मुझे है उबारा,

मैं अकेले में रोती रही जब,

तूने आकर के मुझको दुलारा |

आ भी जाओ माँ इक बार फिर से,

सूना आँगन हुआ है हमारा |

आज फिर से तुझे है पुकारा,

कैसे पाऊँ मैं दामन तुम्हारा |

क्या हुई भूल मुझसे मेरी माँ,

किया तूने जो मुझसे किनारा |

कोई ज्योति दिखाओ जरा माँ,

हाथ छोड़ो नहीं अब हमारा |

आंसुओं ने है तुझको पुकारा,


राह तकते हैं नैन तुम्हारा |

No comments: