Thursday, 21 May 2015

ऊँची-नीची है डगरिया

ऊँची-नीची है डगरिया, पर्वत की कठिन चढ़इया,

वैष्णो देवी चलूंगी, माँ के दर्शन करुँगी,

ऊँची-नीची है डगरिया |

नंगे हैं पाँव मेरे छाले पड़ेंगे,

मइया के दर्शन को फिर भी चलेंगे |


मइया की लाली चुनरिया, कठिन हो चाहे डगरिया |

लेहड़ा देवी चलूंगी, माँ के दर्शन करुँगी,

ऊँची नीची है डगरिया |

राहों में कंकड़ या पत्थर पड़ेंगे,

प्यास लगी हो तो वो भी सहेंगे |

सुन लेना मेरी अरजिया, कठिन हो चाहे डगरिया,

विंध्याचल को चलूँगी, माँ के दर्शन करुँगी,

ऊँची-नीची है डगरिया |

मइया के दर्शन को कब से हैं प्यासे,

उनको चढ़ाऊँगी पेड़े-बताशे |

पहुचूँगी निमिया की छहियाँ, बहियाँ पकड़ लेना सइया,

पाटन देवी चलूँगी, माँ के दर्शन करूंगी,


ऊँची-नीची है डगरिया |

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