ऊँची-नीची है
डगरिया, पर्वत की कठिन चढ़इया,
वैष्णो देवी चलूंगी,
माँ के दर्शन करुँगी,
ऊँची-नीची है डगरिया
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नंगे हैं पाँव मेरे
छाले पड़ेंगे,
मइया के दर्शन को
फिर भी चलेंगे |
मइया की लाली
चुनरिया, कठिन हो चाहे डगरिया |
लेहड़ा देवी चलूंगी,
माँ के दर्शन करुँगी,
ऊँची नीची है डगरिया
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राहों में कंकड़ या
पत्थर पड़ेंगे,
प्यास लगी हो तो वो
भी सहेंगे |
सुन लेना मेरी
अरजिया, कठिन हो चाहे डगरिया,
विंध्याचल को
चलूँगी, माँ के दर्शन करुँगी,
ऊँची-नीची है डगरिया
|
मइया के दर्शन को कब
से हैं प्यासे,
उनको चढ़ाऊँगी
पेड़े-बताशे |
पहुचूँगी निमिया की
छहियाँ, बहियाँ पकड़ लेना सइया,
पाटन देवी चलूँगी,
माँ के दर्शन करूंगी,
ऊँची-नीची है डगरिया
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