चलो मिल के मनालो आज
मइया को नवरातन में,
माँ आई है चल के आज
हमारे घर आँगन में ,
चलो मिल के मनालो आज
मइया को नवरातन में |
जगमग-जगमग दीप जला
लो,
सिर जाके झुका लो आज
मइया को नवरातन में |
नारियल चढ़ा लो चुनरी
चढ़ा लो,
लाल फूलों से माँ को
सजा दो,
माँ मिलती नहीं
बार-बार, मनालो नवरातन में |
मइया का दरबार सजा
है आके कीर्तन गाओ जी,
मइया को जाने मत
देना मन में इन्हें बसाओ जी |
माँ आई हैं पहली बार
हमारे घर आँगन में,
चलो मिलके मनालो आज
मइया को नवरातन में |
No comments:
Post a Comment