हर दिन है मइया का मइया
की रात है,
आई नवरात्र है आई
नवरात्र है |
हर घर में आजकल मइया
का वास है,
आई नवरात्र है आई
नवरात्र है |
आठों पहर माँ की
ज्योति जले,
सारा जहाँ माँ के
कदमों तले |
मइया है रहती नीम
तले,
गुड़हल चढ़े और धूप जले
मइया की सेवा में
भूख न प्यास है,
आई नवरात्र है आई
नवरात्र है |
नारियल चढ़े कहीं
चुनरी चढ़े,
मइया की पूजा से
अनधन बढ़े |
राहों में कितने हों
कांटे पड़े,
दर्शन को नंगे कदम
चल पड़े |
‘मंजू’ को बस माँ के
दर्शन की आस है,
आई नवरात्र है आई
नवरात्र है |
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