विद्या की इस बगिया
के हम हैं बागबां,
इससे है पहचान हमारी
ये हमारी जां – 2
हम हैं बागबां यहाँ
के हम हैं बागबां – 2
विद्या की इस बगिया
के हम हैं बागबां |
अलग-अलग फूल यहाँ, खुशबू
अलग है सबकी,
रंग-बिरंगे फूलों
से, ये फुलवारी महकी |
विद्या की इस बगिया
के हम हैं बागबां |
रहे यही संकल्प सदा,
फूल कोई न मुरझाए,
स्नेह ज्ञान से
सिंचित होकर,
ये दुनिया को महकाए
|
विद्या की इस बगिया
के हम हैं बागबां |
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