Friday, 13 February 2015

बेटी की विदाई

बेटी की होती विदाई क्यों बाबुल,

बेटी क्यों होती पराई – 2

ऊँगली पकड़ जिसकी चलना सिखाया,

बाँहों के झूले में लेके झुलाया,


ऐसी दुलारी तुम्हारी थी बाबुल,

कैसे हुई फिर पराई |

बेटी की होती विदाई क्यों बाबुल,

बेटी क्यों होती पराई |

बगिया में तेरे खिली जो कली,

महकाने आँगन पराया चली |

तेरे ही दिल का टुकड़ा थी बाबुल,

क्यों मेरी कर दी विदाई |

बेटी की होती विदाई क्यों बाबुल,

बेटी क्यों होती पराई |

दौलत से बेटी को तौला है किसने,

ममता के आँचल को रौंदा है किसने – 2

किसने ये रीत बने है बाबुल,

मैके से होती जुदाई |

बेटी की होती विदाई क्यों बाबुल,

बेटी क्यों होती पराई |

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