‘नीना’ को ‘रजनीश’
मिले, जैसे ‘काजल’ नैनों
में |
‘रौनक’ है छाई घर
में, शादी की ‘शुभ’ घड़ियों
में |
‘नव्या’नुभूति हुई
मन में, बजे शहनाइयां आँगन
में |
मधुर-मधुर मुस्कान
से दुल्हन, देखे सबको घूँघट में
|
ईश्वर की ‘महिमा’ से
जोड़ी, रहे सदा
दूल्हा-दुल्हन की |
खुशियों से महके
उनकी बगिया, तो आये ‘तृप्ति’
‘मंजू’ के मन में |
छोड़ के ‘वैभव’ मैके
का, ‘स्नेहा’कुल बाबुल
से दूर,
चली नववधु ‘सृष्टि’
रचने |
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