Sunday, 8 February 2015

भाग्य

हे देव! मेरे भाग्य में है क्या लिखा ?

दुर्भाग्य से लड़कर मुझे जीना सिखा,

था दोष क्या मेरा जो तूने खेल खेला ?

निर्दोष को क्यों दे दिया इतना झमेला,


जीवन दिया तो जीवन से लड़ना सिखा,

हे देव! मेरे भाग्य में है क्या लिखा ?

थी आज तक दुनिया मेरे विश्वास पर,

धोखा मिला आई है बन मेरी साँस पर,

आँसू दिया तो उसे पीना भी सिखा,

हे देव! मेरे भाग्य में है क्या लिखा ?

जिस चीज़ को अपना समझती थी सदा,

वो कब पराई हो गई मुझसे बता,

सब छिन गया आशा की ज्योति तो दिखा,

हे देव! मेरे भाग्य में है क्या लिखा ?

गंगा हिमालय से निकल बहती रही,

मानव के हर अन्याय को सहती रही,

कुछ न्याय कर अन्याय से लड़ना सिखा,

हे देव! मेरे भाग्य में है क्या लिखा ?

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