हे देव! मेरे भाग्य में है क्या
लिखा ?
दुर्भाग्य से लड़कर
मुझे जीना सिखा,
था दोष क्या मेरा जो
तूने खेल खेला ?
जीवन दिया तो जीवन
से लड़ना सिखा,
हे देव! मेरे भाग्य
में है क्या लिखा ?
थी आज तक दुनिया
मेरे विश्वास पर,
धोखा मिला आई है बन
मेरी साँस पर,
आँसू दिया तो उसे
पीना भी सिखा,
हे देव! मेरे भाग्य
में है क्या लिखा ?
जिस चीज़ को अपना
समझती थी सदा,
वो कब पराई हो गई
मुझसे बता,
सब छिन गया आशा की
ज्योति तो दिखा,
हे देव! मेरे भाग्य
में है क्या लिखा ?
गंगा हिमालय से निकल
बहती रही,
मानव के हर अन्याय
को सहती रही,
कुछ न्याय कर अन्याय
से लड़ना सिखा,
हे देव! मेरे भाग्य
में है क्या लिखा ?
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