जान जाये तो जाये
वतन के लिए,
जिंदगानी मिले तो
वतन के लिए,
जान जाये तो
जाये..........
खून कितने बहे तब
तिरंगा मिला,
मांगे सूनी हुई सूना
आँगन हुआ |
राखी बहनों की भी
रोक पाई नहीं,
यूँ ही चलता रहा मौत
का सिलसिला |
देश के दुश्मनों के
पतन के लिए,
जान जाये तो
जाए.........
जान अपनी गँवा के गए
वीर जो,
हैं हमारे दिलो में
बसे आज वो |
मौत को चुन लिया देश
हमको दिया,
भूलना है नहीं उनके
बलिदान को |
जान जाये तो
जाए.............
हाथ खाली अगर हो तो
कुछ गम नहीं,
सर हमारा तिरंगे के
नीचे रहे |
सर हमारा झुके भी तो
कुछ गम नहीं,
पर तिरंगा गगन से भी
ऊंचा रहे |
फूल बनकर खिलें इस
चमन के लिए,
जान जाये तो जाए वतन
के लिए |

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