Tuesday, 27 January 2015

जान जाये तो वतन के लिए






जान जाये तो जाये वतन के लिए,
जिंदगानी मिले तो वतन के लिए,
जान जाये तो जाये..........
खून कितने बहे तब तिरंगा मिला,
मांगे सूनी हुई सूना आँगन हुआ |
राखी बहनों की भी रोक पाई नहीं,
यूँ ही चलता रहा मौत का सिलसिला |
देश के दुश्मनों के पतन के लिए,
जान जाये तो जाए.........
जान अपनी गँवा के गए वीर जो,
हैं हमारे दिलो में बसे आज वो |
मौत को चुन लिया देश हमको दिया,
भूलना है नहीं उनके बलिदान को |
जान जाये तो जाए.............
हाथ खाली अगर हो तो कुछ गम नहीं,
सर हमारा तिरंगे के नीचे रहे |
सर हमारा झुके भी तो कुछ गम नहीं,
पर तिरंगा गगन से भी ऊंचा रहे |
फूल बनकर खिलें इस चमन के लिए,

जान जाये तो जाए वतन के लिए | 

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