तेरा साथ था नहीं जब
थी जिंदगी अधूरी ,
सजे ख्वाब आज सारे
हुई हसरतें वो पूरी ।
तेरा साथ............।
मौसम थे आते जाते
बिखरा सा गुलिस्तां था ,
मंजिल नहीं कहीं थी
कांटों भरा सफर था ।
दरिया में जाके कश्ती
कबसे रुकी थी मेरी ,
तेरा साथ...........।
अब साथ है जो तेरा
कुछ भी कमी नहीं है ,
हर मुश्किलों से लड़के
मंजिल नयी मिली है ।
हम साथ साथ चलके
जीतेंगे दुनिया सारी ।
तेरा साथ.............।
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