सखी आयो- सखी आयो,
सखी आयो बसन्त ऋतु
आओ गुलाल बरसाओ री।
आओ-आओ.....।
मनवा हिलोर मारे पुरवा बयरिया,
झूम-झूम गाये महुववा की डरिया।
अमवा पे लागे बौर फागुन आयो री।
आओ-आओ......।
हरे-भरे खेतवा में सरसों पियरिया,
लागे सुहावन कोयलिया की बोलिया।
बागों में नाचे मोर फागुन आयो री।
आओ-आओ.....।
राधा के संग रंग खेलें कन्हैंया,
भीग जाये राधा की धानी चुनरिया।
गलियों में मच गयी शोर फागुन आयो री।
आओ-आओ......।
Tuesday, 14 March 2017
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