आके खड़ी दरबार सज-धज मैया हमार ,
लाली चुनरिया अंगो पे चमके,
काली बदरिया आई घुमड़ के।
बिंदिया से दमके लिलार । सज-धज......।
मैया के पावों में सोहे मेहावर ,
'मंजू, के होला मनवा निछावर ।
पायल करे झनकार ,
घड़ी - घड़ी मैया तोहार। आके खड़ी......।
भक्तन के भीड़ लगलबा भवन में,
सबके बसेलू मैया तू मन में।
मंदिर भ इल गुलजार ,
जब अइलू मैया हमार।
आके खड़ी..........।
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