Wednesday, 22 March 2017

आके खड़ी दरबार (भजन )


आके खड़ी दरबार सज-धज   मैया हमार ,

लाली चुनरिया अंगो पे चमके,

काली बदरिया आई घुमड़ के।

बिंदिया से दमके लिलारसज-धज......।

मैया के पावों में सोहे मेहावर ,

'मंजू, के होला मनवा निछावर ।

पायल करे झनकार ,

घड़ी - घड़ी मैया तोहार। आके खड़ी......।

भक्तन के भीड़ लगलबा भवन में,

सबके बसेलू मैया तू मन में।

मंदिर  भ इल  गुलजार ,

जब अइलू मैया हमार

आके खड़ी..........।

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