Tuesday, 21 March 2017

दर तेरे (भजन )

दर तेरे आऊँ माँ कैसे दूर जो हो इतनी मुझसे,

मूरत तेरी मन मंदिर में मैंने बनाई है कबसे।

दर तेरे...........।

ना कोई मेरा ना है पराया,

जबसे छाया माँ तेरा साया।

भूल भी हो तो भूल ना जाना,

दूर ना जाना माँ मुझसे।

दर तेरे............।

जो भी है सब तुझपे समर्पित ,

तन भी अर्पित मन भी अर्पित।

और करूं क्या तुझको अर्पण,

जब सब है तेरा जग में ।

दर तेरे..............।

प्रीत लगी माँ जबसे तुमसे ,

दूर हो चली मैं तो मुझसे ।

रग - रग में बसती हो मेरे  ,

दिखती हो माँ कण - कण में  ।

दर तेरे...............।

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