Saturday, 11 February 2017

माटी रही पुकार

माटी रही पुकार दूर ना जा
आंखों के तारे, 🌌☺️
लौट आ लाल हमारे। 🏡
जिस बगिया की खुशबू से,
महका यह जीवन तेरा,
जिस की डाली डाली पर
होता था तेरा बसेरा।
गलियां रही निहार
लौट आ ओ भवरे मतवाले,
आ जाओ लाल हमारे,
आ जाओ लाल हमारे।
जिस ममता ने सींचा तुमको,
जिस आंचल में बङे हुए।
जिन हाथों से खाई रोटी,
आज उसी को भूल गए।
मिलता नहीं उधार प्यार, मां का ऐसा प्यारे,
लौट आ लाल हमारे,
लौट आ लाल हमारे।
धूप में जलता रहा,
स्वयं पर छाया देता रहा तुम्हें।
अब आज सहारा मांग रहा,
तो चले अकेला छोड़ उसे।
सीख लिया चलना तुमने,
तो उड गए पंख पसारे।
आ जाओ लाल हमारे,
आ जाओ लाल हमारे।

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