अवतार धरे मइया जब-जब जग में पाप बढे,
काली
बनकर मइया दुष्टों का नाश करे,
अवतार
धरे मइया जब-जब जग में पाप बढे |
ब्रह्मा, विष्णु
महेश भी जिसकी, करते नित दिन पूजा,
जिससे बड़ा दुनिया
में और न कोई दूजा |
जिसके चरणों में
झुकने पर सबका मान बढ़े,
अवतार धरे मइया जब-जब जग में पाप बढे |
चण्ड-मुण्ड ने पाप
किया, जग को संताप दिया,
मद में होके
शुम्भ-निशुम्भ ने था उत्पात किया |
चूर किये मद मधु-कैटभ
के जब वो माँ से लङे,
अवतार धरे मइया जब-जब जग में पाप बढ़े |
महिषासुर
और रक्त-बीज ने माँ को क्रुद्ध किया,
किया
प्रचण्ड रूप माँ ने, फिर उनसे युद्ध किया |
चण्डी
बनकर मइया ने उनके संहार किये,
अवतार
धरे मइया जब-जब जग में पाप बढे |
No comments:
Post a Comment