Friday, 22 May 2015

अवतार धरे मइया

अवतार धरे मइया जब-जब जग में पाप बढे,

काली बनकर मइया दुष्टों का नाश करे,

अवतार धरे मइया जब-जब जग में पाप बढे |

ब्रह्मा, विष्णु महेश भी जिसकी, करते नित दिन पूजा,


जिससे बड़ा दुनिया में और न कोई दूजा |

जिसके चरणों में झुकने पर सबका मान बढ़े,

अवतार धरे मइया जब-जब जग में पाप बढे |

चण्ड-मुण्ड ने पाप किया, जग को संताप दिया,

मद में होके शुम्भ-निशुम्भ ने था उत्पात किया |

चूर किये मद मधु-कैटभ के जब वो माँ से लङे,

अवतार धरे मइया जब-जब जग में पाप बढ़े |

महिषासुर और रक्त-बीज ने माँ को क्रुद्ध किया,

किया प्रचण्ड रूप माँ ने, फिर उनसे युद्ध किया |

चण्डी बनकर मइया ने उनके संहार किये,

अवतार धरे मइया जब-जब जग में पाप बढे |

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