Thursday, 21 May 2015

मइ‌‍या तेरी ज्योति

मइ‌‍या तेरी ज्योति जलाऊँ दिन-रात -2

मेरे घर आओ मनाऊँ दिन–रात,

मइ‌‍या तेरी ज्योति जलाऊँ दिन-रात |

तू कहे तो दीप बनूँ माँ,


तू कहे तो बन जाऊं बाती |

लिख-लिख भेजा तुझको पाती,

कितना पुकारूँ क्यूं नहीं आती |

मइ‌‍या तेरा कलश धराऊँ दिन-रात,

मेरे घर आओ मनाऊँ दिन-रात |

मइ‌‍या तेरी ज्योति जलाऊँ दिन-रात,

मुझको दुनिया के मेले,

भाये नहीं अब लगें झमेले |

जबसे तुझमें ध्यान लगा माँ,

रहना चाहूँ मैं तो अकेले |

मइ‌‍या तेरा हवन कराऊँ दिन-रात,

मेरे घर आओ मनाऊँ दिन-रात |

मइ‌‍या तेरे उज्जवल नैना, ले गये ‘मंजू’ के चैना,

जबसे तू मेरे साथ है मइ‌‍या |

नहीं पता मुझे दिन व रैना,

मइ‌‍या तेरा भजन मैं गाऊँ दिन-रात |

मेरे घर आओ मनाऊँ दिन-रात,

मइ‌‍या तेरी ज्योति जलाऊँ दिन-रात,


मेरे घर आओ मनाऊँ दिन-रात |

No comments: