Sunday, 18 January 2015

नारी के रूप


नारी तेरे रूप अनेक.............
क्षमा करे तो जननी है,
प्रेम करे तो पत्नी है,
क्रोध करे तो दुर्गा है,
हो प्रसन्न तो लक्ष्मी है |

नारी तेरे रूप अनेक............ 
सृजन करे तो श्रृष्टि है,
नाश करे तो काली है,
भार सहे तो धरती है,
क्षुधा भरे अन्नपूर्णा है |
नारी तेरे रूप अनेक..............
लाज तजे तो पतिता है,
यम से लड़े सावित्री है,
हर विपदा में सीता है,
हर नर की पूरक नारी है |  


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