नारी तेरे रूप
अनेक.............
क्षमा करे तो जननी
है,
प्रेम करे तो पत्नी
है,
क्रोध करे तो दुर्गा
है,
हो प्रसन्न तो
लक्ष्मी है |
नारी तेरे रूप
अनेक............
सृजन करे तो
श्रृष्टि है,
नाश करे तो काली है,
भार सहे तो धरती है,
क्षुधा भरे
अन्नपूर्णा है |
नारी तेरे रूप
अनेक..............
लाज तजे तो पतिता
है,
यम से लड़े सावित्री
है,
हर विपदा में सीता
है,
हर नर की पूरक नारी
है |
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